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बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर अभिजीत दीपके का सरकार पर तंज, X पर पोस्ट किया ‘मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा’

‘इस्तीफे’ में सरकार पर कई सवाल

भोपाल/बालाघाट, 13 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक व्यंग्यात्मक इस्तीफा पत्र पोस्ट करते हुए खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात कही।

दीपके ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए लिखा कि उन्हें मध्य प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर मिला, लेकिन वह इसमें “स्पष्ट रूप से विफल” रहे। हालांकि, यह कोई वास्तविक संवैधानिक इस्तीफा नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर किया गया व्यंग्य है।

बालाघाट में 30 से अधिक बच्चों की मौत का मामला

यह मामला बालाघाट जिले में आदिवासी समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की कथित तौर पर संक्रामक बीमारियों से हुई मौत से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, मृतक बच्चों में बैगा और गोंड आदिवासी समुदाय के बच्चे शामिल हैं। इस मामले को लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बालाघाट कलेक्टर समेत संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे दीपके

अभिजीत दीपके शनिवार को बालाघाट के अदोरी, कोरका और बोंदारी गांव पहुंचे थे। उन्होंने प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर बच्चों की मौत और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की जानकारी लेने की कोशिश की।

इसी दौरान कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने उन्हें घेरकर सवाल किए और आरोप लगाया कि वह बच्चों की मौत के मामले में राजनीति करने पहुंचे हैं। वायरल वीडियो में दीपके से उनकी देरी से पहुंचने को लेकर भी सवाल किए गए। बाद में स्थिति बिगड़ने पर CJP कार्यकर्ताओं ने उन्हें दूसरी कार से वहां से रवाना कराया। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि सभी पहलुओं पर नहीं हुई है।

‘इस्तीफे’ में सरकार पर कई सवाल

इसके बाद दीपके ने X पर मुख्यमंत्री के नाम से इस्तीफे वाला पत्र पोस्ट किया। पत्र में उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, पेयजल और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को लेकर सरकार की जवाबदेही पर भी तंज कसा।

दीपके के इस पोस्ट को राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर देखा जा रहा है। वह वास्तविक रूप से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं हैं और इसलिए उनके द्वारा पोस्ट किया गया पत्र मुख्यमंत्री का संवैधानिक इस्तीफा नहीं है।

विवाद के बाद FIR की मांग भी उठी

इस्तीफा पत्र पोस्ट किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दीपके के खिलाफ कार्रवाई और FIR की मांग भी की है। आलोचकों ने उनके द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में खुद को प्रस्तुत करने और सरकारी शैली के लेटर का इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, ऐसी किसी FIR या कानूनी कार्रवाई की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

निष्कर्ष: अभिजीत दीपके का ‘इस्तीफा’ वास्तविक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं है। यह बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत और मध्य प्रदेश सरकार की कथित विफलताओं पर निशाना साधने वाला उनका व्यंग्यात्मक राजनीतिक पोस्ट है।

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